हिंदू नव वर्ष और गुड़ी पड़वा

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गुड़ी पड़वा के दिन ही हिंदुओं का नव वर्ष प्रारंभ होता है जो नवरात्रि का पहला दिन और चैत्र मास का आरंभ होता है हिंदू नववर्ष विक्रम संवत के हिसाब से मनाया जाता है।

विक्रम संवत की शुरुआत 57 ईसा पूर्व में हुई थी। भारतीय राजा विक्रमादित्य ने ही विक्रम संवत की शुरुआत की थी, कहा जाता है  राजा विक्रमादित्य ने शाकों के शासन से प्रजा को मुक्ति दिलाई थी और उनका कर्ज माफ कर दिया था, और इसी जीत की स्मृति में उन्होंने विक्रम संवत की शुरुआत की थी।

गणितीय दृष्टिकोण से इस संवत को सबसे सही माना जाता है और यही राष्ट्रीय संवत भी माना जाता है। 12 महीनों में 1 वर्ष और 7 दिन में 1 सप्ताह विक्रम संवत से ही प्रारंभ किया गया था। महीनों का हिसाब सूर्य और चंद्रमा की स्थिति के द्वारा ही रखा गया और चंद्रमा की स्थिति के हिसाब से महीनों का नामकरण किया गया।

गुड़ी पड़वा जो हिंदू कैलेंडर के हिसाब से नया साल का आरंभ करता है इसको हिंदू वर्ग के अलग-अलग लोग अलग-अलग नाम से इस पर्व को मानते हैं आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में इसको उगाडी, कर्नाटक में युगडी,यह सिन्धी समुदाय द्वारा चेति चांद के रूप में मनाया जाता है, कश्मीर में नवरे और मणिपुर के सजीबु नोंगमा पानबा चेराबा और महाराष्ट्र में गुडी पडवा के नाम से मनाया जाता है ‘गुडी’ का अर्थ ‘विजय पताका’होता है।

यह पर्व कई लोगों द्वारा मनाया जाता है जो अपने घरों को साफ करते हैं और नए-नए कपड़े खरीदते हैं आम और नीम की पत्तियों को बांस की मदद से गुड़िया बनाते हैं और अपने घर के प्रवेश द्वार पर लटका देते हैं। शाम को सब लोग इकट्ठा होते हैं और पंचांग सुनते हैं।

गुड़ी पड़वा रबी फसलों की कटाई पूर्ण होने के संकेत भी देता है
ऐसा भी कहा जाता है कि ब्रह्मा जी ने इस दिन सृष्टि की रचना की थी।

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