मोहनपुरा बांध एक शोषण परियोजना 

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मोहनपुरा बांध मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले की सबसे बड़ी परियोजना, जो ब्यावरा से 15 किलोमीटर दूर राजगढ़ के एक छोटे से गांव बांस खेड़ी में बनाया जा रहा है. जो करीब 485 करोड़ की मदद से दिलीप बिल्ड कॉम के द्वारा बनाया जा रहा है। यह राज्य सरकार के द्वारा बनाई जा रही सबसे बड़ी परियोजनाओं में से एक है।

मोहनपुरा बांध

इस बांध के बनने से करीब 7056 हेक्टेयर भूमि जलमग्न होगी और इस परियोजना के तहत नहरो का निर्माण किया जाएगा, जिससे बंजर भूमि मे भी हरियाली आएगी और किसानों को बहुत फायदा होने का अनुमान है।
पर आप सोच रहे होंगे इस परियोजना को मैंने शोषण नाम क्यों दिया , बल्कि यह बहुत लाभकारी प्रोजेक्ट, इससे फायदा किसान भाइयों को और उद्योग क्षेत्र को जिससे उनको पानी की पूर्ति की जा सकती है।

मोहनपुरा बांध

हमने इस प्रोजेक्ट के फायदे तो देखे हैं लेकिन नुकसान कोई देखना नहीं चाहता क्योंकि जो नुकसान होगा वह गरीब वर्ग के किसानों का ही होगा।

मोहनपुरा बांध के डूब क्षेत्र में शाहपुरा,आशापुरा,बख्तारपुरा,पनाली,परसुलिया,मांडाखेड़ा,लाडऩपुर,मोहनपुरा,टांडी नाईहेड़ा,उदपुरिया,कोलूखेड़ा,शाहपुरिया जागीर,कलालपुरा,अभयपुरा,सुरजपुरा, रायपुरिया घाटा,करनवास,झूमका,बाईहेड़ा,डुंगपुरा,बलवीरपुरा, शबोरदा,घोघडिय़ा,जागीर,बीरमपुरा,समेली,बांसखेड़ी,कराडिय़ा,मांझरीखो,लक्ष्मणपुरा,राजलीबे,बानपुरा,चोकी,नलखेड़ा,गोपालपुरा और बख्तारपुरा सहित अन्य कुछ गांवों की जमीन डूब में आ रही है।

जो एक अखबार के द्वारा दी गई जिस से करीब हजारों लोग पलायन करने के लिए मजबूर हो गए अपने पुश्तैनी गांव से, सरकार ने इनकी की मदद के लिए मुआवजा जो किस्तों में दिया , उससे उनको आर्थिक मदद सही तरीके से नहीं मिल पा रही और उन्हें बढ़ती जमीनों के दाम और महंगाई का सामना करना पड़ रहा, अब वह लोग अपने नए घर के लिए जमीन तलाश करने में जुटेेे हुए हैं।

इस क्षेत्र के सभी लोग किसान है उनके पास कोई और पैसे कमाने का जरिया नहीं है हमारी सरकार ने बांध बना बनाकर गांव के गांव तबाह कर दिए और मदद के लिए उन्हें लोलीपोप बताकर कड़वी दवाई पिला दी गई।

आर्थिक मदद के लिए उन्हें मात्र 2.50 लाख पर बिगा दिया गया और सस्ते दामों में उनकी खेती उनसे छीन ली गई, इस क्षेत्र में साल में दो ही फसल, सोयाबीन और गेहूं मुख्य रूप से उगाई जाती है।

सरकार ने जो मुआवजा दिया अगर उसका आकलन करें तो यह बहुत ही कम मुआवजा सरकार द्वारा हमारे किसान भाइयों को दिया गया।

जब हमने इस क्षेत्र में डूब रहा गांव सूरजपुरा के बारे में पता किया, तो हमें बहुत पीड़ा हुई हमारे किसान भाइयों की हालत देखकर, वह जो सबसे गरीब किसान है उनके पास 3 से 4 बिगा खेती करने के लिए जमीन है और वह उस के माध्यम से अपने घर का पालन पोषण करते हैं, जो अब डूब क्षेत्र में है और मुआवजे की एक किस्त भी दे दी गई है अब वह भी कोई और जमीन जुगाड़ करने में लगे हुए हैं जिससे खेती कर सकें और फिर से अपने परिवार का पालन पोषण कर सके, पर जमीनों के भाव आसमानों को छू रहे हैं उनका कहना है कि जो सरकार हमें मुआवजा दे रही है उससे ना तो हम खेती के लिए जमीन और ना ही अपना घर खरीद सकते हैं

surajpura village

जब हमने उनसे और पता करने की कोशिश करी तो एक अनोखी बात उनके द्वारा सुनने को मिली, उन्होंने कहा कि हमारी पूरी जमीन डूब क्षेत्र में हैं लेकिन हमारे घर डूब में नही, अब उनकी समस्या यह है कि जो क्षेत्र डूब में है वह मात्र 100 से 250 मीटर घर की दूरी पर है वह चाहते हैं कि हमें हमारे घर का मुआवजा भी सरकार दे, क्योंकि हम पानी से घिरे हुए क्षेत्र में नहीं रह सकते, यहां हमारी जान का खतरा बढ़ता रहेगा।

जब उन्होंने इस बारे में आला अधिकारियों से बात की तो उन्हें कोई जवाब नहीं दिया गया, फिर वह कलेक्टर साहब के पास ज्ञापन देने गए तो वहां से भी संतुष्ट पूर्ण जवाब नहीं मिला।

क्या हमारी सरकार इसी तरह किसानों का शोषण करती रहेगी कब तक हमारे किसानों को मारा जाएगा जबकि हमारे अन्नदाता किसान है जो पूरे देश को जीने के लिए जीवन देते हैं अगर इन्होंने खेती करना बंद कर दिया तो शायद हमारा जीना मुश्किल हो जाएगा।

(stock dam of surajpura, it will be submerged after mohanpura dam)

हमारी सरकार को इस विषय पर ज्यादा से ज्यादा चर्चा करनी चाहिए और हमारे किसान भाइयों को ज्यादा से ज्यादा मदद पहुंचाने की कोशिश करना चाहिए।

जब हमारे किसान भाई देश को अपनी जमीन समर्पित कर सकते हैं तो क्यों हमारी सरकार चंद पैसों में किसानों का मोल करती है।

अगर हमारी सरकार मुआवजे के साथ-साथ सरकारी नौकरी काबिलियत( शिक्षा) के हिसाब से परिवार के एक सदस्य को देने का वादा करें जिनकी जमीन पूरी तरह डूब क्षेत्र में हो जिससे हमारे किसान वर्ग के लोगों को आर्थिक मदद मिलेगी।

पहले भी राजगढ़ जिले की दो परियोजना के तहत हजारों गांवो को तबाह किया गया।

हमारी सरकार को इस विषय पर सोचना चाहिए और गांव के गांव तबाह होने से बचाना चाहिए वरना हमारे देश की रीड कमजोर पड़ने लगेगी।

अब हमारे अधिकारियों को ऐसी वाले ठंडे कमरों से बाहर निकल कर किसान भाइयों की पीड़ा को देखना चाहिए, कि वह पानी से घिरे हुए घरों में कैसे रह सकते हैं उन्हें ज्यादा से ज्यादा आर्थिक मदद देने की कोशिश करना चाहिए वरना गांव खत्म होने लगेंगे और एक दिन ऐसा आएगा जब हमारी सरकार गांव को पर्यटन स्थल बनाकर बताएगी कि ऐसे होते थे गांव।

6 COMMENTS

  1. Yes off course
    We should think about it becauss its a huge loss of the villagers in this dam….the money which is given to them is not enough to survive their family

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