मशरूम(mushroom) बना लाभ का व्यवसाय।

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जानते हे आज एक ऐसे किसान के बारे में जिसने 10000 का लोन लेकर मशरूम(mushroom) की खेती चालू की और आज लाखों में टर्नओवर करते हैं, और अगर आप मशरूम साइंटिस्ट भी कहें तो कोई बड़ी बात नहीं क्योंकि पिछले 29 सालों से लगातार वह मशरूम की खेती कर रहे हैं, जिसमें उन्होंने सरल तरीके से मशरूम की खेती करने की तकनीक को इज्जत किया है।

हम बात कर रहे हैं श्री राम किशोर जी कहार कि जो बेतुल डिस्ट्रिक्ट के एक छोटे से गांव सील पट्टी में रहते हैं और पिछले 29 सालों से मशरूम की खेती कर रहे हैं और इसी के साथ उन्होंने मशरूम बीज का भी उत्पादन चालू किया है जिसमें पूरे भारत में मशरूम के बीज को सप्लाई करते हैं।

कैसे मशरूम(mushroom) की खेती चालू की..

रामकिशोर जी कहार एक गरीब मछुआ परिवार में जन्मे पिता की आय अच्छी न होने के बाद भी जुझारूपन व गरीबी का मज़ाक उड़ानें वालों को सबक देने के लिए क्षमता से बाहर जाकर बेरोजगारी से जुझते हुए शिक्षा प्राप्त की। शाहपुर वि०ख० में 1991 में पदस्थ ADO श्री राजुरकर सर के माध्यम से ट्राईसेम योजना में 3 माह की ट्रेनिंग प्राप्त की जो कि अखिल भारतीय स्तर की थी।

मन में कुछ अच्छा करने की ललक के कारण शीघ्र अपना स्वरोजगार स्थापित करने हेतु 10000 का लोन लिया जिसमें उन्हें मात्र 3000 रुपयों की सब्सिडी भी मिली, और यहीं से उनका मशरूम की खेती करने का सफर चालू हुआ और आज वह पूरे भारत में मशरूम साइंटिस्ट के नाम से भी जाने जाते हैं जो खुद का “विक्रम मशरूम” का उत्पादन करते हैं और उसी का बीज भी सप्लाई करते हैं। ।

मशरूम(mushroom) प्रशिक्षण कहां कहां से लिया..

वैसे तो उन्होंने बहुत जगह से मशरूम खेती करने का प्रशिक्षण प्राप्त हुआ लेकिन जो भारत के सर्टिफाइड चुनिंदा प्रशिक्षण केंद्र से प्रशिक्षण दिया गया।

  • पहले ट्रेनिंग होशंगाबाद से की जो 3 महीने तक चली थी।
  • 1994 और 1995 के बीच जबलपुर कृषि विद्यालय से प्रशिक्षण दिया गया।
  • प्लांट पैथोलॉजी डिपार्टमेंट भुवनेश्वर( उड़ीसा ) से भी प्रशिक्षण प्राप्त किया।
  • इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर से भी प्रशिक्षण प्राप्त किया।
  • भा०कृ०अ०प० दिल्ली यूनिवर्सिटी से भी प्राप्त किया।
  • राष्ट्रीय खुंब अनुसंधान एंड प्रशिक्षण केंद्र हिमाचल प्रदेश से भी प्रशिक्षण करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।

मशरूम(mushroom) में मिली उपलब्धियां..

  • मशरुम ग्रोवर एसोसिएशन ऑफ इंडिया द्वारा मध्य प्रदेश के अध्यक्ष भी चुने गए, जिसमें उनका कार्यकाल 2011 से 2012 तक रहा।
  • सन 1992 मैं मध्यप्रदेश के भोपाल में राज्स्तरीय पुष्प फल और साग भाजी प्रदर्शनी में प्रथम पुरस्कार मिला।
  • 1997 और 98 में कृषक वंदना पत्रिका में मशरूम एक लाभकारी धंधा का लेख प्रकाशित किया।
  • एशियन कॉन्सोशियम आफँ फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड भोपाल मध्य प्रदेश द्वारा मशरूम के क्षेत्र में योगदान हेतु प्रमाण पत्र दिया गया।
  • सितंबर 2006 में डिपार्टमेंट आँफ पब्लिक रिलेशन मध्य प्रदेश सरकार द्वारा एक स्तंभ का प्रकाशन।
  • पर्यावरण संरक्षण एवं आदिवासी विकास केंद्र हेतु प्रमाण पत्र दिया गया।
  • मार्च 2007 में महामहिम राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जी.ए. कलाम महोदय से मिले और आस्टर मशरूम को बढ़ावा देने हेतु राष्ट्रीय हित में निवेदन जिसका राष्ट्रपति सचिवालय द्वारा सराहना पत्र जारी किय।
  • अप्रैल 2008 में प्रसार भारती आकाशवाणी महानिदेशालय नई दिल्ली के महानिदेशक द्वारा सम्मान पत्र प्राप्त हुआ।
  • जनवरी 2009 में छत्तीसगढ़ के माननीय मुख्यमंत्री श्री रमन सिंह जी के ग्रह ग्राम कवरधा सहित संपूर्ण छत्तीसगढ़ के मशरुम उत्पादक एवं विज्ञानिको द्वारा निरीक्षण कर कम लागत मशरूम तकनीकी की सराहना।
  • सितंबर 2009 में मध्य प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान और विज्ञान प्रौद्योगिकी मंत्री श्री कैलाश जी विजयवर्गीय द्वारा सरहाना एवं विज्ञान प्रौद्योगिकी परिषद द्वारा सम्मान पत्र प्राप्त हुआ।
  • कार्यालय अधीक्षक जिला बेतूल मध्य प्रदेश द्वारा प्रमाण पत्र दिया गया।

ऐसी कई और सम्मान पत्र वा सर्टिफिकेट उनके पास है जो उनकी उपलब्धियों का वह उनकी मेहनत से अवगत कराते हैं।

मशरूम(mushroom) बीज उत्पादन..

अब श्री राम किशोर जी कहार बड़े पैमाने पर मशरूम बीज उत्पादन करते हैं और समूचे भारत में सप्लाई करते हैं।

बड़ी-बड़ी कंपनियां के माध्यम से मशरूम विदेशों तक पहुंचा रहे हैं। अभी फिलहाल रसिया(Russia) मैं अगर सीलपटी गांव का मशरूम मिले तो यह आश्चर्यचकित वाली बात नहीं होगी क्योंकि वह माया एग्रोटेक प्रोटेक्ट के साथ मिलकर अपने मशरूम को एक्सपोर्ट करते हैं। एक्सपोर्ट का काम फिलहाल माया एग्रोटेक प्रोटेक्ट के द्वारा करते हैं।

मशरूम ट्रेनिंग प्रोग्राम…

फिलहाल तो श्री राम किशोर जी बिना किसी शुल्क के मशरूम ट्रेनिंग प्रोग्राम देते है और सस्ते में बीज उपलब्ध कराते हैं।

उन्होंने खुद का अपना मशरूम लेबोरेटरी तैयार किया है जिसमें वह मशरूम स्पान की क्वालिटी को चेक करते हैं उसी के बाद वह उस बीज को सप्लाई करते हैं। आदिवासी लोगों को भी मशरुम की फसल उगाने के लिए प्रेरित करते हैं और ट्रेनिंग प्रोग्राम के जरिए उन्हें सरल विधि से मशरूम उगाने की तकनीक बताते हैं।

मशरूम(mushroom) मार्केट…

जब हमने उनसे मशरूम मार्केट के बारे में जानने की कोशिश की तो उन्होंने बताया कि उनके द्वारा उगाया मशरूम प्रोष्टिक व प्रोटीन युक्त व अनेक रोगो में लाभकारी होने के कारण आम व्यक्तियो में मशरूम को खाने के लिए प्रेरित करते हैं जिससे बहुत सा मशरूम लोकल बाजार में ही बिक जाता है तथा सूखे मशरूम हेतु पर्याप्त मार्केट उपलब्ध है।

उन्होंने बताया कि मशरूम क्वालिटी का घ्यान रखा जावे तो मशरूम आसानी से बिक सकता है कई कम्पनिया एक्सपोर्ट हेतु तैयार है।और दिल्ली में भी सीलपटी गांव का मशरूम आपको मिल सकता है जो बड़े-बड़े रेस्टोरेंट में सप्लाई किया जाता है।

मशरूम की खेती कैसे करें..

वैसे तो इस खेती को करने के लिए ज्यादा जगह की जरूरत नहीं पड़ती, यह 15×20 फुट के एक कमरे में भी इसकी खेती कर सकते हैं। इसमें आपको जरूरत पड़ेगी धान के या फिर गेहूं के भूसे की, पानी की,व मशरूम स्पान की। भुसे को अच्छी तरह से धोकर उपचारित किया जाता है और उपयुक्त समय पर जब में 75% नमी हो, तो इसको एक पॉलिथीन के बैग में भरते हैं जिसमें मशरूम स्पान को डाल देते है।

कमरे का तापमान लगभग 18 डिग्री से 25 डिग्री सेल्सियस के बीच में होना चाहिए यानी कि अगर हम कमरे में अंदर जाएं तो हमें कमरा ठंडा लगे, कमरे को ठंडा रखने के लिए दिन में दो बार पानी का स्प्रे करें, और नमी 70%-85% के बीच होना चाहिए।

पहली फसल 20 से 25 दिन के अंदर आ जाती है और दूसरी फसल 5 – 7 दिन बाद, तिसरी फसल 5-7 दिन बाद यानी की एक बार स्पान डालने पर 3 फसल व 60 दिन में आप 3 – 4 बार फसल ले सकते हैं।

मशरूम खेती लेने के बाद जो उसका भूसा बचता है उसका जैविक खाद भी बनाया जाता है।

अधिक जानकारी के लिए आप श्री राम किशोर जी कहार(8120403777,8103044179) से सीधे बात कर सकते हैं अगर आप मशरूम की खेती करना चाहते हैं तो, यहां से आपको मशरूम स्पान(mushroom seeds) बीज उपलब्ध करा देंगे।

12 COMMENTS

  1. । अपनी खेती अपना खाद , स्वस्थ मिट्टी उत्तम स्वाद ।
    जैविक खेती ही भारतीय किसानो का सुनहरा “कल ” है ।
    हम हमारी आने वाली पीढ़ी को स्वस्थ और उर्जीत मृदा(मिट्टी) दे पायगे । जिससे आने वाली पीढ़ी को अपेक्षित उत्पादकता प्राप्त करने मे असुविधा नही होगी ।
    प्रकृति तो हमे पर्याप्त मात्रा मे पानी(7-12 लाख लीटर/प्रति हैक्टर) देती है लेकिन हम उस पानी का संरक्षण/संवर्धन करने मे ना काफी प्रयास कर रहे है । इस विषय पर अब देश का हर छोटे-बड़े किसानो को अपनी सहयोगात्मक भूमिका निभाने का हर संभव प्रयास करना पड़ेगा , जब ही हम इस चुनौती विजय प्राप्त करने मे सक्षम होंगे ।

  2. मशरूम जैसी खेती के बारे में आपका विवरण उन सभी जागरूक किसानों के लिए एक उदाहरण है जो उत्तम व जैविक खेती को बढ़ावा देकर आने वाले भविष्य को एक जैविक भारत का उदय करवाना चाहते है।निश्चित ही इससे रासायनिक मुक्त खेती की कल्पना का सपना साकार होगा।

    Oldvillegers की टीम को धन्यवाद। जो निरन्तर ऐसी जानकारी हम तक पहुचाने का कार्य कर रहे है।

  3. Sir,i want to start calivation of mashroom in maharashtra. is it possible for farming . If its possible,please send full information about mashroom

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