कामाख्या (kamakhya temple ), अद्भुत अकल्पनीय शक्तिपीठ की यात्रा ।

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    Trip to kamakhya Devi Assam

    एक अद्भुत अकल्पनीय यात्रा जो भोपाल से शुरू होकर डिब्रुगढ़ से कामाख्या देवी तक।

    kamakhya temple Guwahati

    हमारी जो यात्रा, वह भोपाल से डिब्रूगढ़ तक थी , जो अरुणाचल से सटा हुआ आसम का सबसे आखरी शहर है वही से आसाम में ब्रह्मपुत्र नदी का आगमन भी होता है।

    यात्रा का उद्देश्य (kamakhya temple)

    यात्रा का मेन उद्देश्य हमारी रेलवे की परीक्षा, इसका सेंटर हमें आसाम का एक छोटा शहर डिब्रूगढ़ में मिला था जो भोपाल से लगभग 2300 किलोमीटर की दूरी पर था।

    2 दिन की यात्रा के बाद हम लोग डिब्रूगढ़ पहुंचे उस यात्रा के दौरान हमारी पहचान एक अनजान व्यक्ति से हुई जो डिब्रुगढ़ में ही रहते थे, उन्होंने हमें आसाम के कल्चर और वहां के मंदिरों के बारे में बताया ।

    जिसमें कामाख्या देवी, जो एक प्रसिद्ध 51 शक्तिपीठों में से एक है, के बारे में भी कुछ जानकारी दि, तो हम लोगों ने यह निर्णय किया परीक्षा देखकर हम कामाख्या देवी के दर्शन जरूर करेंगे, जो की गुवाहाटी से लगभग 5 से 8 किलोमीटर की दूरी पर था।

    कैसे पहुचे कामाख्या देवी(kamakhya temple) तक ।

    हम लगभग सुबह 6:00 बजे कामाख्या देवी रेलवे स्टेशन पर पहुंच गए वही हम लोगों ने स्नान ध्यान करके , एक मारूति वैन पकड़कर कामाख्या देवी के लिए निकल गए जो एक पहाड़ी पर था।

    सुबह के 8:00 बजे हम लोग कामाख्या मंदिर के पास पहुंच चुके थे मंदिर के बारे में थोड़ा-बहुत हमें उस यात्री ने बता ही दिया था कि मंदिर में आज भी बलि पूजा बहुत जोरों शोरों से होती है और जिन लोगों की मन्नत पूरी होती है वह यहां पर बलि देते हैं।

    और हमारा स्वागत भी कुछ इसी प्रकार हुआ जैसे ही हम ने पहला कदम कामाख्या मंदिर की सीढ़ी पर रखा हमें एक बहुत बड़े भैंसे का सिर रखा मिला, जिसे देख हम लोग अचंभित हो गए थे।

    यहाँ पर नवरात्रि बड़े धूमधाम से मनाया जाता है लाखों यात्री पहुचते है दर्शन के लिए।

    कामाख्या देवी (kamakhya temple) एक चमत्कारी स्थान ।

    हम लोग लगभग 9:00 बजे के आसपास लाइन में लगे और यह सारी घटनाएं हमारे कैमरे में कैद करते रहें वहां पर बलि पूजा बहुत ही बड़े पैमाने पर की जाती है,

    लगभग 4:00 बजे हम लोगों को दर्शन हुए काफी समय हम लोगों ने लाइन में व्यतीत किया।

    कहा जाता है कि कामाख्या देवी अघोरियों तांत्रिकों और काला जादू करने वालों के लिए सबसे अहम जगह मानी जाती है यहां पर लोग सिद्धि प्राप्त करते है ।

    कामख्या देवी (kamakhya temple) का अम्बुवाची पर्व ।

    साल में एक बार यह पर अम्बुवाची पर्व मनाया जाता है, जो सभी तांत्रिकों, मांत्रिकों एवं सिद्ध-पुरुषों के लिए बहुत बड़ा पर्व माना जाता है , देश दुनिया के सभी तांत्रिक ओर सिद्ध पुरुष यहा आकर सिद्धि प्राप्त करते है,

    अम्बुवाची पर्व 3 दिन तक मनाया जाता है, उन्ह तीन दिनों मे माँ के दर्शन करना माना होता इसलिए , ऐसा भी कहा जाता है कि मंदिर के पठ अपने आप बन्द हो जाते है।

    अम्बुवाची पर्व का रहस्य ।

    पौराणिक सत्य है कि अम्बूवाची पर्व के दौरान माँ भगवती रजस्वला होती हैं और मां भगवती की गर्भ गृह स्थित महामुद्रा (योनि-तीर्थ) से निरंतर तीन दिनों तक जल-प्रवाह के स्थान से रक्त प्रवाहित होता है। यह अपने आप में, इस कलिकाल में एक अद्भुत आश्चर्य का विलक्षण नजारा है।

    इस पर्व में मां भगवती के रजस्वला होने से पूर्व गर्भगृह स्थित महामुद्रा पर सफेद वस्त्र चढ़ाये जाते हैं, जो कि रक्तवर्ण हो जाते हैं। मंदिर के पुजारियों द्वारा ये वस्त्र प्रसाद के रूप में श्रद्धालु भक्तों में विशेष रूप से वितरित किये जाते हैं।

    यकीन मानिए ऐसा मंदिर हम लोगों ने आज तक नहीं देखा था, अद्भुत अकल्पनीय शक्तिपीठ यहां आकर दर्शन करना एक बहुत बड़े सौभाग्य की बात थी, अगर सच्चे मन से यह प्राथना की जाए तो आप की मानो कामना पुर्ण जरूर होगी ।

    Travellers, photo from kamakhya Devi temple

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