आखिर किसान आंदोलन क्यों हुआ?

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    आखिर किसानो को आंदोलन करने की जरुरत क्यों पड़ी?

     पिछले कुछ दिनों में पूरे देश में किसानो ने बहुत हिंसक और  अहिंसक आंदोलन किये। जिसमे कही किसानो की जान  चली गई और कई सार्वजनिक संम्पत्ति कुछ ही घंटो में  जलकर राख हो गई। खासकर जो मन्दसौर में हुआ वो बहुत  ही निन्दनीय था।

     आखिर क्यों किसानो की इसकी जरुरत  पड़ी  इस कृषि  प्रधान देश में जहा हमारा नारा जय जवान और जय किसान है ?

      आइये इसका जवाब ढूंढने की  कोशिश करते है।

     सब जानते है पिछले दो सालो में मध्यप्रदेश में 5200  किसानो ने आत्म हत्या की है और हमारा मध्यप्रदेश कृषि में  अवार्ड ले रहा है।

     एक विधायक जिसकी मासिक वेतन 50000 से 125000  हो गया कुछ ही सालो में, और हर सरकारी कर्मचारी और  अधिकारी का वेतन पिछले पाँच सालो में डेढ़ गुना हो गया।  लेकिन किसानो की फसलो के दाम कम होते जा रहे। 

     जो सोयाबीन आज से दो साल पहले ओसतन 3500  क्विनटेल बिकती थी आज वही 2800  में बिक रही है।तब  खाने वाले तेल की कीमत 80 से 90 हुआ करती थी और  आज जब सोयाबीन 2800 है, तब भी तेल की कीमत 80  से 90 ही है ऐसी स्थिति में किसन क्या करें।

    आज से 2 साल पहले मसूर का भाव 4500 से उपर था, तब डीएपी खाद का भाव 560 के आसपास था और आज के समय पर मसूर 3200 के आसपास है और डीएपी खाद का भाव आज 1150 के आसपास, सोचो आज क्या हालत है हमारे किसान भाइयों की ।

    प्याज 1 रुपया या दो रुपया किलो बिक रहा था। आंदोलन के बाद हमारी सरकार ने प्याज का समर्थन मूल्य 8 रुपए किलो  रखा, जो कि आंदोलन से पहले भी रखा जा सकता था, आलू और दूसरी फसल का भी यही हाल है।

    एक छोटा दूध उत्पादक अपना दूध डेरी पर 25-30 रुपया में बेचता है जिसकी लागत उसे 40 रुपये लीटर पड़ती है। और वही दूध में पानी मिलाकार दूकानदार 45 से 50 रूपये लीटर बेचता है।

    आज हमारे देश में किसान की सालाना ओसतन आय 73000 रुपया और उसके ऊपर ओसतन लोन 50000 है। अब बताओ इतनी सी आय में वो कहा से लोन चुकाए और घर चलाये।

    हर सरकार विज्ञापन में अरबो रुपया  खर्च कर देती है लेकिन इतने रुपया का वह किसानो का लोन माफ़ कर देती तो शायद उसे विज्ञापन करने की जरुरत ही नहीं पड़ती है।

    हमारी सरकार बड़े बड़े घरानो को अरबो की सब्सिडी दे सकते है लेकिन किसानो को नहीं।

    90% किसान जिनके ऊपर लोन है वो सिर्फ या तो ब्याज भरते है या लोन का पलटी करवा लेते है लेकिन लोन नहीं चूका पाते है क्योंकि उनकी इतनी आय ही नहीं है और सरकार बोलती है हम आय को दुगना करेंग।

    इन् सब कारणों से किसान परेशान हो गया था और अंदर ही अंदर गुस्सा हो रहा था। जिस कारण यहाँ भीषण आंदोलन हुआ।

    इस आंदोलन में कही असामाजिक तत्वों ने किसानो की आड़ में लूट की और ना जाने आम जनता को बहुत नुकसान पहुचाया।

    इन सब समस्या से निपटने के लिए सरकार को किसान की तरह सोचने की जरुरत है। कोई अवार्ड मिल जाने से किसानो का कोई भला नहीं हो सकता ,जमीनी स्तर पर काम करना होगा ताकि किसानो को आत्म हत्या करने की जरुरत ना पड़े।

    जय हिन्द।

    जय जवान जय किसान।।   

                                     

                                                  किसान पुत्र..                                                               हंसराज जयसवाल……

    2 COMMENTS

    1. Thik hai… But kisano Ko kisi rajniti ka hissa na bante huye sarkar se baat krni chahiye…. KrashiPradhan jaise Bharat Desh m kisano k dyara Kia gya jaam-Maan ka nuksan Ko b andekha nhi Kia ja Sakta….

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